उस दिन गोली चल जाती तो ?

एक जीरो हीरो बन सकता है लेकिन एक जीरो मुसीबत क्यों बन गया ??

आखिर उस दिन क्या हुआ था जो गोली चलाने की बात हो गई ??

पढ़िए मेरी लिखी एक कहानी 👇

यह कहानी नहीं एक मेरा स्वयं का अनुभव है ✍️


उस दिन गोली चल जाती तो ?


ट्यूशन की क्लास चल रही थी ।बच्चों को गणित और विज्ञान पढ़ाने में राम्या मशगूल थी लगभग दस बच्चे बैठे अपनी अपनी किताब पर आंखें गड़ाए सर झुकाए । वे पूरी कोशिश कर रहे थे कि उन्हें सब सही सही समझ आ जाए और परीक्षा देते समय उन्हें आसानी हो ।

एक नंबर भी कम आ जाए तो बच्चों को परेशानी घेर लेती है ।गला काट कंपटीशन के इस माहौल में किसी भी स्थान को पाने के लिए बहुत ज्यादा भीड़ होती है और मारामारी रहती है। यहां प्रतिभागियों के चयन की प्रक्रिया का प्रारूप ऐसा तैयार किया जाता है कि कितने अधिक से अधिक प्रतिभागी स्वयं ही निलंबित हो जाएं।

इतना गंभीर माहौल के होते हुए भी राम्या के साथ बच्चे अपने आप को बहुत ही सहज महसूस करते थे ।राम्या का एक ही मकसद होता था कि बच्चे बहुत ही अच्छे से सभी चीजों को समझ जाएं और सदा आगे रहे , लेकिन वे किसी भी प्रकार से पढ़ाई का अत्यधिक दबाव महसूस ना करें ना ही वह अपना हौसला खोए और हमेशा उत्साहित बने रहें । उनमें किसी तरह का अवसाद ना भर जाए।

राम्या लगी हुई थी अपनी लगन में कि तभी

एक अचानक से कुछ अलग तरह की आवाज ने उसे लगभग आज डरा ही दिया था ।

वह आवाज थी अनिरुद्ध की।

कहता है ......"मेम सोचो अगर आप को एक टाइम मशीन मिल जाये तो आप क्या कीजिएगा?" यह प्रश्न था अनिरुद्ध का ।

अनिरुद्ध जिसे विज्ञान तो पसंद था लेकिन गणित से उसे बिल्कुल भी लगाव नहीं था । बच्चों पर खास दबाव रहता है कि गणित में अच्छे नंबर लाना ही लाना है क्योंकि एक अजीब सी मानसिकता है हमारे समाज में कि गणित में अच्छे नंबर आते है तो वह बच्चा पढ़ाई लिखाई में होशियार है और जिसे नहीं आते है वह कितना भी किसी और विषय में अच्छा हो उसे बेवकूफ हीं समझा जाता है।

वैसे यह ना तो पहली बार था और ना ही पहली बार ऐसा हुआ हो कि अचानक से यह तेज आवाज आई हो । राम्या इतना सहज माहौल बना कर रखती थी कि बच्चे अक्सर ही उससे इस तरह की बातें बिना किसी तकल्लुफ के पूछा करते थे और न जाने कितनी तरह की और भी बातें जो उनकी बेहद निजी होते हुए भी वे राम्या से साझा करते थे।

फिर भी राम्या आज अनिरुद्ध के इस अचानक के सवाल पर पहले तो हंस पड़ी क्यों कि गणित की कक्षा के कारण बच्चे मुख्यतः पढ़ाई से संबंधित प्रश्नों में ही उलझे हुए होते हैं और यह अनिरुद्ध टाइम मशीन के बारे में पूछ रहा था । राम्या को लगा कि लगता है इसने कोई फिल्म देखी है और उसकी ही कल्पनाओं में पढ़ाई करते हुए भी खोया हुआ है। बहुत सी ऐसी फिल्में बनी है जिसमें टाइम मशीनों के बारे में कहानियां दिखाई गई है। हो सकता है अनिरुद्ध ने ऐसी ही कोई फिल्म देखी हो इसलिए वह टाइम मशीन के बारे में पूछ रहा है।

राम्या ने एक ज़िम्मेदार शिक्षक की तरह उसे कुछ समझाने का प्रयास शुरू ही किया था कि उसने बीच में ही पुनः राम्या को रोक दिया और कहता है ....."नहीं वो सब नहीं बस आप ये कहो आप क्या करते ?"

राम्या कुछ देर के लिए निरुत्तर हो गई ।उसके पास कोई जवाब नहीं था। गणित बनाते बनाते अनिरुद्ध को गणित का कौन सा सवाल टाइम मशीन की याद दिला गया इस बात से वह थोड़ी अचरज में थी।

वह हममममम....हाँं ऽऽ … कर कुछ सोच ही रही थी कि वह पुन: तपाक से कहता है ......"जाने दो मेम मेरी सुनो मुझे अगर मिलती तो मैं आर्यभट को जा कर गोली मार देता ।

राम्या बुरी तरीके से हक्की बक्की हो गई । उस समय जितने भी बच्चे साथ में बैठे पढ़ रहे थे सबकी नजर राम्या और अनिरुद्ध की तरफ ही स्थिर हो गई ।बच्चों की भी हालत लगभग वैसे ही थी कुछ बच्चे तो मुस्कुरा रहे थे हल्की हल्की सी ही ही ही ही की आवाज निकल रही थी और कुछ बच्चे आंखें गोल किए मुंह को भी गोल किए अचरज से सोच रहे थे कि अब आगे क्या वार्तालाप होगी ।

अनिरुद्ध आगे कहता है "न उसने zero बताया होता न हमें मैथ के सवाल बनाने होते और तो और ये मैथ ने साइंस को भी बेकार कर दिया है पता नहीं कहाँ कहाँ अटके पड़े हैं ये ज़ीरो।"

राम्या तो गुम उसे लगा ग़नीमत है अनिरुद्ध ने यह तो नहीं कहा कि जितने भी मैथ के शौकीन हैं और उसे पढ़ाने वाले हैं उन्हें ही गोली मार दी जाए गनीमत है उसने यह नहीं कहा कि गणित का नामोनिशान मिटा दिया जाए ।गनीमत है उसने राम्या को गोली नहीं मारी ।

खैर यह तो हंसी मजाक की बात थी कोई गंभीर बात नहीं थी क्योंकि अनिरुद्ध बहुत ही अच्छा लड़का था अच्छे संस्कारों वाला था और अच्छे माता-पिता का बच्चा था। वह सिर्फ बोल रहा था क्योंकि बच्चों को ऐसी झुंझलाहट हो ही जाती है इस झुंझलाहट में शिक्षकों का और अभिभावकों का यह कर्तव्य होता है तो बच्चे पर ध्यान दें यह झुंझलाहट और इस तरह की परेशानियां उनके अंदर किसी तरह की नकारात्मकता ना पैदा कर दें और वह नकारात्मकता इतनी गहरी ना हो जाए कि एक दिन सच में वह बच्चा कोई बहुत ही गलत हरकत कर जाए

राम्या ने उसे ज़ीरो की हेर-फेर से भी निकाला और उसके सवाल को सुलझाया लेकिन यह तो सच्चाई है कि वह पढ़ाती तो गणित ही है जो ज्यादातर बच्चों के लिए परेशानी का कारण है ।

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