तेरे अधरों की मुस्कान

~~~ किस जन्म की अनोखी तेरी प्रीत की ये तपिश है। मुस्कान तेरे अधरों पर सजाने की बडी़ ख्वाहिश है। जो पा न सका दिल वो तुम्हे देने की मेरी कोशिश है। मेरे होठों से जो वक्त छीन ले गया है। खुली पंखुड़ियों को बेजान कर गया है। अब आंसू की तपिश न उसे खिलाते है। बंजर बन गये मृत अधर न मुस्काते है। तेरी पंखुड़ियों में इंद्रधनुषी रंग भरना है। होठों पर मुस्कान के शबनम सजाना है। किस जन्म की अनोखी तेरी प्रीत की ये तपिश है। मुस्कान तेरे अधरों पर सजाने की बड़ी ख्वाहिश है। जो पा न सका दिल वो तुम्हे देने की मेरी कोशिश है। साथ चलने में चोट लगेगी जान लो तुम। हो जाओगे ग़म की बारिश से गीले तुम। मेरे आश्रु से न अपने अश्रु मिलाओ तुम। मेरी मर चुकी मोहब्बत पर न तड़पो तुम। जिन्दगी मौत के मंजर में न सजाओ तुम। बस यूँ हीं साथ-साथ मेरे चलते रहना तुम। किस जन्म की अनोखी तेरी प्रीत की ये तपिश है। मुस्कान तेरे अधरों पर सजाने की बडी ख्वाहिश है। जो पा न सका दिल वो तुम्हे देने की मेरी कोशिश है। -- रश्मि किरण

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