नाचती बूंदें

क्या आपने बरसात की बूंदों को कभी नाचते देखा है? बरसात की बूंदें तो अक्सर नाचा करती हैं तेज हवा के झोंके पर मेघ गर्जन की लय पर तड़पती चपला की उर्जा पर ऐसा हीं एक दिन था ऐसी ही नाचती बूंदों थीं देखकर कुछ शब्द लयबद्ध हो गए मेरी किताब तेरी मोहब्बत में यानी ऐ जिंदगी तेरी मोहब्बत में की पेज नंबर 33 पर आप 19वीं संख्या की कविता पढ़ेंगे तो शायद आपको भी ऐसा ही कुछ अनुभव होगा और अगर नहीं हुआ हो तो किसी ऐसी ही बरसात में आपको मेरी यह कविता की बोल याद आ जाएंगी जिनके पास मेरी यह किताब है उनसे आग्रह है कि इस कविता को पढ़ें और मुझे बताएं कैसा अनुभव हुआ और जिन्होंने यह किताब नहीं ली है और चाहते हैं इस अनुभव से गुजरना तो मुझे अवश्य बताएं क्योंकि किताब उन तक पहुंच सकती है पर कैसे यह बस मैं बता सकती हूं😊

-- रश्मि किरण

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