"नीड़ न कभी खाली होगा"


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नीड़ बन गये प्राण

पनपी वहाँ नई जान

जीवन गति समेटे

नीड़ की ओट में लेटे

तैयार था भरने उड़ान


उड़ गया जो पंख पसारे

पर नीड़ न कभी ख़ाली होगा

गूंजेंगी चहक चहुँ ओर यादें

थका हुआ फिर यहीं आयेगा

नीड़ की ओट में लेटे

सदा आन्नदित ख़ुद को पायेगा

क्षितिज पाने फिर फिर जायेगा

नीड़ न कभी ख़ाली होगा।

..........रश्मि किरण

३०/१२/१५

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