बेखबर हूं खुद से

प्रीत का रंग बूंदों नें घोला

मोर पपीहा बन मन डोला

मलय पवन बन उड़ उड़ जाऊं

सांसों में समा लो

बेखबर हूं खुद से

और मुझे प्यार दो

राही की पोटली (बेखबर हूं खुद से)

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