मेरे दोस्त की याद

हमारी प्रकृति हमारी सबसे अच्छी दोस्त है जिसे हम इंग्लिश में कहते हैं बेस्ट फ्रेंड ... जितने भी दार्शनिक हुए जितने भी महान साहित्यकार हुए और सभी संतों ने तो खासकर आम जनता को कुछ भी संदेश देने के लिए और समझाने के लिए कि जीवन का मूल भाव क्या है आदि समझाने के लिए प्रकृति को ही माध्यम बनाया है ....एक समय था जब हमारे पूर्वज हवा के रुख हवा की ताप पेड़ पौधों में होते परिवर्तनों की भाषा आदि को समझते थे और प्रकृति से संदेश ग्रहण कर लेते थे ...पशु पक्षियों के क्रियाकलापों को देखकर उन्हें बहुत से संदेश मिल जाया करते थे.... उस समय ऐसे बड़े-बड़े यंत्र नहीं थे जो हमें वातावरण के बारे में बता सके जो हमें मौसम परिवर्तन के बारे में बता सके और गौर करेंगे तो आप देखेंगे उस समय जो अनुमान हमारे पूर्वज लगाते थे वह अनुमान आज के अनुमानों से कहीं अधिक सटीक हुआ करता था

परंतु आज जब चारों तरफ मशीनों का बोलबाला है मशीन मानव दिमाग से भी तेज काम करता है यहां तक की महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने यह संदेश दे डाला कहीं ऐसा ना हो कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव को ही अपने कब्ज़े में कर ले और अपना गुलाम बना दे वहीं हम ऐसी हालातों में इस बदले हुए माहौल में प्रकृति से बहुत दूर होते जा रहे हैं.. ज्यादा से ज्यादा बस होता है तो हम चार गमलें अपने घरों में रख लेते हैं और इसका सबसे बड़ा ख़ामियाज़ा जो मानव सभ्यता ने भुगतना शुरू कर दिया है ऐसा हीं रहा तो आगे के आने वाले समय में जो विकराल रुप होगा वह है अकेलापन या एकाकीपन


प्रकृति और एकाकीपन इसमें क्या संबंध हो सकता है... क्योंकि हम संग साथ तो इंसानों का चाहते हैं ...अगर हम अकेले हैं तो इसका मतलब है कि हमारे आस पास दोस्त नहीं है या रिश्तेदार नहीं है या हमने खुद को अकेला कर लिया है इससे प्रकृति का क्या लेना देना .. परंतु आज अकेलेपन या एकाकीपन और प्रकृति से संबंध इस बात को ही समझने की बहुत ही आवश्यकता है...

प्रकृति हमारा बहुत ही अच्छा करीबी दोस्त हैं ...आप जब नंगे पांव घास पर चलते हैं तो उसका स्पर्श आपके अंतरात्मा तक एक आनंद पहुंच जाती है आपके अंदर कैसी भी नकारात्मक उर्जा हो छटने लगती है आखिर एक दोस्त क्या ऐसा नहीं करता है? वह आपको आश्वासन देता है कि आपके अंदर का दर्द और दुख वह कम हो तो क्या घास यह नहीं कर रही?

जब आप एक बहुत ही अच्छे और सुंदर पौधे के पास बैठते हैं किसी फूल को निहारते हैं आपके अंदर जो आनंद आता है और सबसे बड़ी बात जब आप बाग़वानी करते हैं पौधे लगाते हैं उन पौधों को सींचते हैं उनमें आने वाले फल फूल को पनपते बढ़ते हुए अपनी कृति इस मनोंभाव से देखते हैं हर बार आपके अंदर एक खास होने का एहसास होता है कि यह मैंने किया है यह मेरे सामने पनप रहा है वह एक आनंदमयी उर्जा बन जाती है और आप के अंदर होने वाले दुख दर्द में आप को अपना मान कर जो एक इंसान देगा वह आपको राहत प्रकृति देती है इसके लिए प्रकृति के साथ समय बिताने और उसको समझने की आवश्यकता है अगर आप पेड़ पौधों से दोस्ती कर बैठेंगे अगर आप आसपास के जानवरों से दोस्ती कर बैठेंगे आप गौर से देखेंगे उन्हें समझने की कोशिश करेंगे तो आप पाएंगे कि आप बहुत ही आनंद में है और यह लगभग वैसा ही आनंद है जैसा आनंद एक दोस्त के साथ कुछ पल बैठकर एक हमराज के साथ कुछ पल बैठकर एक बहुत ही अच्छे व्यक्ति के साथ कुछ पल बैठकर आपको प्राप्त होता है

एक छोटी सी कहानी प्रस्तुत है इससे प्रकृति हमारी सबसे अच्छी दोस्त हैं यह अनुभव कर सकते हैं

एक लड़की थी रश्मि उसे प्रकृति से बचपन से ही लगाव रहा था परंतु उसने कभी ऐसा नहीं सोचा था की प्रकृति उसकी सबसे अच्छी दोस्त बन जाएगी और ऐसे समय में जिस समय में वह बिल्कुल ही अकेली होगी किसी से उसे सहारा नहीं मिल रहा होगा तब प्रकृति ही उसका मनोबल बढ़ाएगी हिम्मत बढ़ाएगी और उसे जीने के लिए प्रेरित करेगी यह बात बचपन में उसे पता ना थी जब वह जिंदगी के एक ऐसे दहलीज पर आकर खड़ी हो गई जहां उसके आस पास के समाज ने उसे दर्द दिए थे और उन्हीं दर्दों से मुकाबला करती वह तरक्की के शिखर पर भी चढ़ती जा रही थी यहां भी उसकी तरक्की से जलने वालों से उसका मुकाबला था कि तभी एक असाध्य और असाधारण शारीरिक समस्या से उसका सामना हुआ जहां पर डॉक्टर ने यह कह दिया के बस भगवान की दुआ है तो तुम्हारी जिंदगी है … अब अकेले हीं उसका मुकाबला चल रहा था … अपने स्वभाव के अनुसार वह प्रकृति के करीब बनी हुई थी उसे पता भी नहीं चला कि कब उसके अहाते में ठीक उसके दरवाज़े के सामने जो गुलाब का पौधा था उसका परम प्रिय मित्र बन गया था

जब भी वह महसूस करती कि वह जिंदगी में शायद और तरक्की नहीं कर पाएगी तब उसे गुलाब के पौधे से यह संदेश मिलता कि देखो मैं कैसे अपनी जड़ जमीन के अंदर मजबूत रखें हूं और मेरे फूलों को देखो कैसे अपना सर ऊंचा किए हुए आकाश को देख रहे हैं सूरज की तरफ बढ़ रहे हैं चाहे जिंदगी छोटी ही क्यों ना है लेकिन जितने दिन की भी है हम अपना सर ऊंचा कर अनंत व्योम को देखते हैं सूरत से आँखें मिलाते हैं और रश्मि पुनः नए जोश से अपनी तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ने लगती थी ...जब भी उसे लगता था जिंदगी में कभी भी वह हार जाएगी किसी भी क्षण मौत उसे अपनी बाहों में ले लेगी तो उस गुलाब के पौधे से संदेश मिलता कि देखो रश्मि एक फूल हमारा अपनी पूरी जिंदगी जी कर अपनी पत्तियां झाड़ गया और वही बगल में एक नयी कली का अवतरण हुआ है जिंदगी की सफलता इसमें नहीं है कि तुम कितना अधिक समय जीते हो जिंदगी इस बात में सफलता पाती है कि तुम कितनी अच्छी जीते हो तुम्हारी जिंदगी सिर्फ सांस लेती हुई एक मशीन ना हो वह जिंदगी से भरपूर हो रश्मि को इस जीवन का अर्थ समझाया गुलाब के पौधे ने ...उसके साथ वह अपने बचपन को हमेशा कुछ पल जी लेती थी उनकी सुंदर घुमावदार पंखुड़ियों की बनावट कली से लेकर फूल तक बनना और फिर फूल की पंखुड़ियों का गिर जाना नए पत्तों का लाल रंग और फिर उन पत्तों का रंग हल्का हरा से गहरा हो जाना पत्तों की बनावट उनका स्पर्श छुअन आदि में उसे हमेशा एक अपनापन मिला और उसकी जिंदगी उन्हीं की बदौलत उन दोस्तों की बदौलत आज तरक्की के शिखर पर है और उसे अब ना तो अपनी बीमारी का भय है ना समाज से मिलने वाले दर्द का कोई मलाल

यह कहानी एक बहुत अच्छा उदाहरण है जो हमें बताता है कि हमें प्रकृति से प्रेम करना चाहिए और यह प्रकृति हमें कभी अकेलापन एकाकीपन में नहीं रहने देगा और अगर हम अवसाद की अवस्था में भी फँस जाते हैं तो इस प्रकृति की दोस्ती से हम हमेशा हीं उससे बाहर निकल सकते हैं और अपनी जिंदगी को बहुत ही अच्छी बना सकते हैं

-- रश्मि किरण

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