मेरे सखा 

देख न ले कोई बाते न बनाये न दे मुझको ताना विरह वेदना कैसे कहूँ पी ने होने दिया तनहा ना कहीं रुसवा न कर दे तेरे नाम से मुझे ज़माना आगोश में छुपा हरदम रखा मेरा साईं पिया रे

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