यादें 

ट्रेन का सफर कितना अच्छा होता है हो सकता है आप में से बहुत लोग मेरी इस बात से सहमत हों और बहुत से नहीं भी लेकिन जब आप दूर तक का सफर लगभग एक दिन रेल की पटरी पर दौड़ते हुए और खिड़की से बाहर दृश्यों को भी अपने साथ दौड़ते हुए देखेंगे तो मुझे यकीन है आपकी कल्पनाएं आपकी यादें आपका मन शांत नहीं रह पाएगा वह भी जरूर दौड़ता है और उसी दौड़ते समय में एक साहित्यकार की यादें उसकी कल्पनाएं वह भी उस रफ्तार में दौड़ने लगती है ऐसे ही दौड़ते समय में लिखी गई मेरी कविता है "यादें"

ऐ जिंदगी तेरी मोहब्बत में की पेज नंबर 73 पर आप 45वीं संख्या की कविता पढ़ेंगे तो शायद आपको भी ऐसा ही कुछ अनुभव होगा और अगर नहीं हुआ हो तो किसी ऐसी ही रेल यात्रा में आपको मेरी यह कविता की बोल याद आ जाएंगी जिनके पास मेरी यह किताब है उनसे आग्रह है कि इस कविता को पढ़ें और मुझे बताएं कैसा अनुभव हुआ और जिन्होंने यह किताब नहीं ली है और चाहते हैं इस अनुभव से गुजरना तो मुझे अवश्य बताएं क्योंकि किताब उन तक पहुंच सकती है पर कैसे यह बस मैं बता सकती हूं😊

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