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हर आहट तु आ गया सा उसे है लगता

न आहट हो वो भी बेचैन बहुत है करता

अब जब है तुम संग नील गगन में उडती

तुमको खो न दे वह है हर पल अब डरती

तन्हाई थी पर खो देने का डर तो न था

इंतजार में यूँ ये दिल तड़पता तो न था


ओ जादूगर कहो न, क्यों रोया था

परियों की कैद शहजादी देख कर

उसके दिल के मृत प्रेम पुष्प को

क्यों खिलाया अपने आंसू देकर

-- रश्मि किरण

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