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शीत सिमटावे मन तोरे बहींया रे

हीयरा में काहे उठे पुरवइया रे

गजब ढ़ाये रामा बलमू जी के प्रीत

चुनरिया उड़ी जाए कहे जुलम हुआ रे

~~रश्मि किरण ❤️

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